मेरा परिचय









मैं तो इक फूल हूं जिसको बहारें छोड़ गईं,
मैं वो इक शाख़ हूं जिसको हवा भी तोड़ गई।

मैं एक राही हूं जिसका ना कोई नाम ना घर,
ना जाने कौन सी मंज़िल है कहां ख़त्म सफ़र।

मैं कोई बूंद हूं जिसकी है छोटी ज़िंदगानि,
ना, मैं बरसात नहीं हूं, हूं आंख का पानी।

मैं इक लहर हूं शायद थक के कभी चूर हुई,
किनारे आके बिखर जाने को मजबूर हुई।

मैं हूं वो घांस दुनिया बैठी और आराम किया,
उठे और चल दिए, पावों के तले रौंद दिया।

मैं हूं एक राह में पड़ा हुआ बेबस पत्थर,
गुज़रने वाले हर इक पांव ने मारी ठोकर।

मैं इक किताब हूं जिसमें लिखी है सच्चाई,
ना ही समझा है किसीने ना दुनियां पढ़ पाई।

मैं इक दीया हूं जिसने भूल बस इतनी की है,
जला है ख़ुद मगर औरों को रोशनी दी है।

मैं आईना हूं जिसपे सबको है अभिमान बड़ा,
दिखाई असली जो सूरत तो टूटना ही पड़ा।

मैंने चाहा था किसी रोज़ गगन को छूना,
आज मैं नीचे हूं ज़मीन के उससे दूना।

वैसे सोचो तो निकल आएंगे कई नाम मेरे,
छुपा हुआ हूं उसीमे जिसे है दर्द घेरे।

ना मुझको समझो के हर दर्द की पहचान हूं मैं,
मैं कोई और नहीं हूं बस एक इंसान हूं मैं।
मैं कोई और नहीं हूं बस एक इंसान हूं मैं ।।

Comments

  1. Bohot hi acha vijaya..keep writing n sharing

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  2. Thank you dear, Now definitely I will keep writing 👍

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