आंखें


मुख की शोभा, मन का दर्पण, कहलाती हैं आंखें
कह ना पाएं जो हम मुंह से, वो कह जाती हैं आंखें

दिल पर चोट लगे, आंसू बन बह जाती हैं आंखें
सपनें हों साकार, तो विस्मित रह जाती हैं आंखें

दुनियां भरके कितने ही दुःख, सह जाती हैं आंखें
लेकिन सब कुछ सह कर भी, चुप रह जाती हैं आंखें


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