ग़म का शिकार
दुनियां ने कहा-रोशनी की तुमको क्या फिकर, अंधेरों से लड़ने को तो दीपक तैयार हैं। हमनें कहा कि कैसे दीए कैसी रोशनी? बुझा दो दीए, हमको अंधेरों से प्यार है। दुनियां ने कहा- मांगा था इक फूल ही तुमने, नज़रें उठाके देखो तो, छाई बहार है। हमनें कहा ये सोचके फिर आएगा पतझड़, बहते हमारी आंखों से आंसू हज़ार हैं। दुनियां ने कहा- चाहा था दिलों को जीतना, आख़िर में हुई उसमें भी तेरी ही हार है। हमनें कहा कि इसमें नहीं दोष किसी का, हमको है ये मालूम ,ये किस्मत की मार है। दुनियां ने कहा- होती है जब दिल को कोई ख़ुशी, नग्में ख़ुशी के छेड़ते तब दिल के तार हैं। हमनें कहा- बज सकते नहीं राग ख़ुशी के, ये दिल हमारा टूटा हुआ वो सितार है। दुनियां ने कहा- कैसा तू इंसान है बता? खुशियों से नहीं, क्यों तुझे इस गम से प्यार है? खुशियां तो मिली, प्यार के दो बोल ना मिले, हमनें कहा कि उनसे जिनपे जान निसार है। दुनियां ने कहा- छोड़ उन्हें,अपनी कर फिकर, उनके लिए क्यों फ़िक्र तुझे बार बार है। हमने कहा कि छोड़ नहीं सकते हम उन्हें, नफ़रत ही मिली चाहे हमें बेशुमार है। अपनों ने जुदा कर दिया, इस डर से हमें कि, उनकी ...

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